क्या है Digital Arrest Scam। Kanpur Digital Arrest Fraud me 57 लाख ठगी केस का मास्टरमाइंड CISF जवान गिरफ्तार, विदेशी नेटवर्क का खुलासा

आज के डिजिटल युग में ऑनलाइन धोखाधड़ी के नए-नए तरीके सामने आ रहे हैं। इन्हीं में से एक खतरनाक तरीका है Digital Arrest Scam। पिछले कुछ समय में भारत में इस तरह के फ्रॉड के कई मामले सामने आए हैं, जिनमें स्कैमर्स लोगों को डराकर उनसे लाखों रुपये ठग लेते हैं।

Digital Arrest Scam awareness image showing cyber criminals posing as police officers on video call to scare people for money

TV9 Bharatvarsh की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, पुणे में एक 81 वर्षीय पिता ने समय रहते सूझबूझ दिखाते हुए अपने बेटे को 12 लाख रुपये के बड़े फ्रॉड से बचा लिया। स्कैमर्स ने खुद को पुलिस अधिकारी बताकर WhatsApp और Signal कॉल के जरिए पीड़ित को डराया और फर्जी केस में फंसाने की धमकी देकर पैसे मांगने की कोशिश की। हालांकि, पिता को शक होने पर उन्होंने तुरंत हस्तक्षेप किया और कॉल कट करवा दी, जिससे यह ठगी होने से बच गई। यह घटना साफ दिखाती है कि “डिजिटल अरेस्ट” जैसे स्कैम पूरी तरह फर्जी होते हैं और लोगों को मानसिक दबाव में डालकर पैसे ऐंठने की साजिश होती है।

Source: TV9 Bharatvarsh (Technology News Report, April 2026)

इसके इलावा हाल ही में दक्षिण दिल्ली में एक डॉक्टर दंपति से लगभग ₹15 करोड़ की ठगी “Digital Arrest” साइबर फ्रॉड के जरिए की गई। स्कैमर्स ने खुद को सरकारी अधिकारी बताकर पीड़ितों को डराया और उनसे पैसे ट्रांसफर करवा लिए। इस तरह के साइबर फ्रॉड को लेकर सुप्रीम कोर्ट भी चिंता जता चुका है और बैंकों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।

Latest Update (29 April): पांच आरोपियों के बाद अब CISF जवान दाउद अंसारी की गिरफ्तारी से केस में बड़ा खुलासा.

ताजा अपडेट: कानपुर में रिटायर्ड अधिकारी से 57 लाख रुपये की डिजिटल अरेस्ट ठगी के मामले में जांच अब और चौंकाने वाले मोड़ पर पहुंच गई है। साइबर क्राइम पुलिस द्वारा पहले पांच आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद इस पूरे गिरोह के मास्टरमाइंड के रूप में ओडिशा के राउरकेला में तैनात CISF जवान दाउद अंसारी का नाम सामने आया, जिसे पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। जांच में खुलासा हुआ कि आरोपियों ने पीड़ित को पुलवामा आतंकी हमले में फंडिंग का झूठा आरोप लगाकर कई दिनों तक डिजिटल अरेस्ट में रखा और डर के माहौल में 57 लाख रुपये अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करा लिए। पुलिस को अब इस गिरोह के तार कई राज्यों के साथ विदेशी साइबर नेटवर्क, खासकर कंबोडिया लिंक से भी जुड़े मिले हैं, जिसके बाद मामले की जांच और तेज कर दी गई है।

इस आर्टिकल में हम जानेंगे कि Digital Arrest Scam क्या है, यह कैसे काम करता है और इससे कैसे बचा जा सकता है।

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Digital Arrest Scam क्या है?

Digital Arrest Scam एक प्रकार का ऑनलाइन साइबर फ्रॉड है जिसमें अपराधी खुद को पुलिस, CBI, ED या किसी सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताकर लोगों को डराते हैं।

स्कैमर्स दावा करते हैं कि:

आपके आधार कार्ड का गलत इस्तेमाल हुआ है

आपके नाम पर मनी लॉन्ड्रिंग का केस है

आपके बैंक अकाउंट में संदिग्ध ट्रांजैक्शन हुआ है

फिर वे कहते हैं कि आपको “Digital Arrest” कर लिया गया है और आपको जांच पूरी होने तक वीडियो कॉल पर रहना होगा। इसके बाद वे पीड़ित से पैसे ट्रांसफर करवाने की कोशिश करते हैं।

Digital Arrest Scam कैसे काम करता है?

यह स्कैम आमतौर पर कुछ चरणों में होता है।

1. डराने वाला फोन कॉल

सबसे पहले स्कैमर्स आपको फोन करते हैं और खुद को पुलिस या किसी सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताते हैं।

वे कहते हैं कि:

आपके खिलाफ केस दर्ज है।

आपका आधार या सिम कार्ड गलत काम में इस्तेमाल हुआ है।

आपको तुरंत जांच में सहयोग करना होगा।

इससे व्यक्ति डर जाता है।

2. वीडियो कॉल के जरिए नकली पूछताछ

इसके बाद स्कैमर्स आपको WhatsApp या Skype पर वीडियो कॉल करने को कहते हैं।

वीडियो कॉल में वे अक्सर:

पुलिस की यूनिफॉर्म पहनते हैं

नकली ऑफिस बैकग्राउंड दिखाते हैं

गंभीर तरीके से पूछताछ करते हैं

सामने वाले को लगे कि यह सच में सरकारी अधिकारी हैं।

3. “डिजिटल अरेस्ट” का दावा

इसके बाद वे कहते हैं कि:

“आपको डिजिटल अरेस्ट किया गया है और जांच पूरी होने तक आप कॉल से हट नहीं सकते।”

यह पूरी तरह फर्जी और गैरकानूनी दावा होता है। भारत में Digital Arrest जैसा कोई कानूनी प्रावधान नहीं है।

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4. पैसे ट्रांसफर करवाना

फिर स्कैमर्स कहते हैं कि:

आपको अपना बैंक अकाउंट “verify” करना होगा

जांच के लिए पैसे अस्थायी रूप से ट्रांसफर करने होंगे

या आपको सिक्योरिटी डिपॉजिट देना होगा

डर और घबराहट में कई लोग पैसे ट्रांसफर कर देते हैं।

Digital Arrest Scam के संकेत

अगर आपको कभी ऐसा कॉल आए तो इन बातों पर ध्यान दें:

✔ कोई भी सरकारी एजेंसी फोन पर अरेस्ट नहीं करती

✔ पुलिस कभी भी वीडियो कॉल पर पूछताछ नहीं करती

✔ कोई भी अधिकारी पैसे ट्रांसफर करने के लिए नहीं कहता

अगर कोई इन बातों का दावा करता है तो समझ जाएं कि यह स्कैम हो सकता है।

Digital Arrest Scam से कैसे बचें

इस तरह के फ्रॉड से बचने के लिए कुछ सावधानियां बहुत जरूरी हैं।

1. घबराएं नहीं

स्कैमर्स का सबसे बड़ा हथियार डर होता है।

अगर कोई अचानक आपको अपराधी बताने लगे तो तुरंत घबराने की जरूरत नहीं है।

2. कॉल तुरंत काट दें

अगर कोई व्यक्ति खुद को पुलिस या सरकारी अधिकारी बताकर पैसे मांगता है तो तुरंत कॉल काट दें।

फिर खुद उस एजेंसी की official website से नंबर लेकर संपर्क करें।

3. निजी जानकारी शेयर न करें

कभी भी फोन या वीडियो कॉल पर:

OTP

बैंक डिटेल

आधार नंबर

पासवर्ड

जैसी जानकारी साझा न करें।

4. अनजान लिंक पर क्लिक न करें, कई बार स्कैमर्स आपको लिंक भेजते हैं और कहते हैं कि इसे खोलकर जानकारी भरें।

ऐसे लिंक फिशिंग वेबसाइट हो सकते हैं।

5. परिवार और दोस्तों को जागरूक करें, अक्सर बुजुर्ग लोग इस तरह के स्कैम का ज्यादा शिकार होते हैं।

इसलिए अपने परिवार को भी Digital Arrest Scam के बारे में जानकारी दें। अगर Digital Arrest Scam हो जाए तो क्या करें।

1️⃣ अपने बैंक को तुरंत जानकारी दें

2️⃣ 1930 Cyber Crime Helpline पर कॉल करें

3️⃣ cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें

जितनी जल्दी शिकायत की जाएगी, पैसे वापस मिलने की संभावना उतनी ही बढ़ जाती है।

भारत में बढ़ते साइबर फ्रॉड

भारत में डिजिटल पेमेंट के बढ़ने के साथ-साथ साइबर फ्रॉड के मामले भी बढ़ रहे हैं।

सरकार और साइबर सुरक्षा एजेंसियां लगातार लोगों को जागरूक कर रही हैं ताकि ऐसे स्कैम को रोका जा सके।

लोगों को सतर्क रहना और सही जानकारी रखना बहुत जरूरी है।

निष्कर्ष

Digital Arrest Scam एक खतरनाक साइबर फ्रॉड है जिसमें स्कैमर्स लोगों को डराकर उनसे पैसे ठग लेते हैं।

याद रखें:

👉 भारत में Digital Arrest जैसा कोई कानूनी प्रावधान नहीं है।

👉 कोई भी सरकारी एजेंसी फोन या वीडियो कॉल पर पैसे नहीं मांगती।

अगर हम सतर्क और जागरूक रहें तो ऐसे फ्रॉड से आसानी से बच सकते हैं।

Disclaimer

यह आर्टिकल केवल जानकारी और जागरूकता के उद्देश्य से लिखा गया है।

किसी भी प्रकार के साइबर फ्रॉड की स्थिति में तुरंत अपने बैंक और आधिकारिक साइबर क्राइम हेल्पलाइन से संपर्क करें।


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