भारत की डिजिटल करेंसी यानी Digital Rupee (e₹) अब सात समंदर पार अपनी धाक जमाने के लिए तैयार है। हाल ही में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के सेंट्रल बैंक के बीच एक ऐतिहासिक समझौता हुआ है। इस समझौते का सीधा असर उन लाखों भारतीयों पर पड़ेगा जो दुबई या UAE के अन्य शहरों में काम करते हैं और अपने घर पैसे भेजते हैं।
आइए विस्तार से समझते हैं कि यह समझौता क्या है।
1. क्या है RBI और UAE सेंट्रल बैंक का यह नया 'डिजिटल ब्रिज'?
भारत और UAE ने अपनी-अपनी सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC) को आपस में जोड़ने का फैसला किया है। इसे 'Cross-Border CBDC Bridge' कहा जा रहा है। सरल शब्दों में कहें तो दोनों अब आपस में बदल सकते है बिना किसी mediater बैंक के।
आज तक अगर आपको दुबई से भारत पैसे भेजने होते थे, तो वो कई बैंकों और 'US Dollar' के रूट से होकर आते थे, जिसमें समय और पैसा दोनों ज्यादा लगता था। लेकिन अब यह काम सीधे और रीयल-टाइम में होगा मतलब अब लेनदेन direct होगा। बीच में कोई थर्ड पार्टी का रूट नहीं होगा।
- ट्रांजेक्शन फीस में भारी कटौती: अभी विदेश से पैसे भेजने पर 3% से 5% तक की फीस और कन्वर्जन चार्ज लग जाता है। डिजिटल रुपये के इस्तेमाल से यह खर्च लगभग शून्य (Zero) या बहुत कम हो जाएगा।
- पलक झपकते ही ट्रांसफर (Instant Settlement): फिलहाल 'SWIFT' जैसे पुराने सिस्टम से पैसे आने में 24 से 48 घंटे लगते हैं। इस नए सिस्टम से पैसे कुछ ही सेकंड्स में आपके भारतीय बैंक अकाउंट में क्रेडिट हो जाएंगे।
- डॉलर पर निर्भरता खत्म: अब भारत और UAE को आपस में व्यापार करने के लिए अमेरिकी डॉलर की जरूरत नहीं होगी। इससे रुपये की वैल्यू भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत होगी।
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- भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था (Digital Economy) को मजबूती मिलेगी।
- सिंगापुर और मॉरीशस के बाद अब मिडिल ईस्ट में भी भारत का डंका बजेगा।
- भविष्य में अन्य देश (जैसे सऊदी अरब और कतर) भी भारत के इस डिजिटल रुपये के साथ जुड़ सकते हैं।
उत्तर: नहीं, डिजिटल रुपया एक 'करेंसी' है, 'पेमेंट इंटरफेस' नहीं। इसे आप अपने डिजिटल वॉलेट में रख सकते हैं और बिना बैंक अकाउंट के भी ट्रांजेक्शन कर सकते हैं। हालांकि, वॉलेट लोड करने के लिए शुरुआत में बैंक की ज़रूरत पड़ सकती है।
उत्तर: नए CBDC ब्रिज के जरिए यह ट्रांजेक्शन 'रियल-टाइम' होगा। यानी जैसे ही वहां से पैसे भेजे जाएंगे, कुछ ही सेकंड्स में वो भारत में प्राप्तकर्ता के वॉलेट में पहुँच जाएंगे।
उत्तर: पूरी तरह खत्म तो नहीं, लेकिन मौजूदा 'वेस्टर्न यूनियन' या 'स्विफ्ट' जैसे सिस्टम के मुकाबले यह फीस 80-90% तक कम हो सकती है, क्योंकि इसमें बीच के बैंक (Intermediary Banks) हट जाएंगे।
उत्तर: हाँ, यह पूरी तरह सुरक्षित है। यह ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी पर आधारित है और सीधे भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा रेगुलेट किया जाता है, जिससे इसमें धोखाधड़ी की गुंजाइश न के बराबर है।
उत्तर: नहीं, जब आप वहां से डिजिटल दिरहम भेजेंगे, तो वह सिस्टम के जरिए ऑटोमैटिकली 'डिजिटल रुपये' में बदल जाएगा और भारतीय यूजर को रुपया ही मिलेगा।

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